WRITTEN BY- SONU RAO
(Lead role -(1) सोनू (2)लावारिश लड़की
Side role- सोनू के पूरा परिवार और और लावारिश लड़की के टीचर और गांव के कुछ लोग )
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Start story
Narration - सोनू एक बार अपने गांव से मार्केट जा रहा था। मार्केट पहुंचते ही देखा कि एक लड़की रो रहीं थीं। सोनू ने अपने बाइक को रोककर उससे पूछता है।
सोनू – क्या हुआ बाबू क्यों रो रही हो ।
लावारिश लड़की –
मेरे मम्मी को कैंसर था जिसके कारण मेरी मम्मी करीब एक साल पहले ही भगवान ने मेरे मम्मी को अपने पास बुला लिया। और मेरे पापा को कल ट्रक वाले ने धक्का मार दिया जिसके कारण वो भी नहीं रहे। और मेरे एक अंकल आंटी हैं वो मुझे नहीं रख रहे हैं।
Narration – सोनू को सारी बात समझ आ गया। फिर सोनू ने बिना सोचे समझे बोला
सोनू – बाबू मेरे घर में रहोगी।
Narration – लावारिश लड़की ने भी सर हिला कर हामी भर दी। सोनू ने उस लड़की को अपनी बाइक पर बैठा कर उसे अपने घर ले गया। घर जाते ही इस लड़की की पूरी कहानी अपने घर वाले को बताया पर कोई भी सोनू के घर के इस लड़की को रखने को तैयार नहीं। सोनू के मम्मी पापा उसे छोड़ने को बोलते हैं। बोलते हैं जहां से लाए हो वहीं छोड़ दो । सोनू बार बार उस लड़की के आंखों में देखता है और उस लड़की के आंखों के दर्द को देखकर सोनू अन्दर ही अन्दर रोने लगता हैं, और सोनू बोलता हैं अपने मम्मी पापा को ठीक है शाम तक इसे छोड़ देंगे। पहले मुझे और इसे खाना दो । सोनू उस लावारिश लड़की के साथ खाना खाता है।
धीरे धीरे शाम हो रहा था। इधर सोनू भी कोई idea ढूंढ रहा था। और शाम होते ही idea ढूंढ लिया। सोनू उस लड़की के साथ निकल जाता हैं सोनू के घर वाले को दिल में ठंडक मिली। सोनू के घर वाले सोच रहे थे कि ये बड़ी हो जाएगी तो इसे शादी करवानी होगी, दहेज़ देना होगा। इसी वजह से टेंशन में आ गए थे।
पर सोनू उसे छोड़ने के बजाय उसे हॉस्टल में ले गया , और प्रिंसिपल से पूछता है सर इसे को एडमिशन करवाना है।
प्रिंसिपल बोलता हैं ठीक है। हो जायेगा क्या नाम है इसका लेकिन सोनू को इसका नाम पता नहीं रहता है। फिर सोनू बोलता हैं इसका नाम स्वेता है। क्यूंकि सोनू अपने फ्यूचर में होने वाले बेटी का नाम चुन कर रखा था। और फिर प्रिंसिपल बोलता हैं । इसके पिता जी का क्या नाम हैं। फिर सोनू अपना नाम ही लिखवा देता हैं।
फिर सोनू वापस घर आ जाता हैं।
5 साल बाद
सोनू को जो पैसे घर से मिलते थे पढ़ने के लिए वो उसी पैसे से स्वेता का खर्च उठा रहा था । लेकिन स्वेता अब दसवीं कक्षा में आ गई थीं। जिससे स्कूल का फीस डबल हो गया था। जिससे स्वेता का खर्च उठाना सोनू के लिए अब असंभव सा हो गया था। लेकिन सोनू स्वेता को अब अपनी बेटी मान चुका था। और सोनू उसके लाइफ में कोई भी कमी नहीं आने देना चाहता था। सोनू अपने घर में अपने मम्मी पापा को जवाब दे दिया मैं जा रहा हूं बाहर अब पढ़ाई लिखाई मेरे बस की नहीं है। सोनू ये बाते बोलकर कुछ ही दिनों में बाहर चला गया। और वहां से पैसे बचा बचाकर स्वेता को पढ़ाते गया। कुछ ही साल में स्वेता डॉक्टर बन जाती हैं। स्वेता डॉक्टर बनते ही सोनू के पास कॉल करती है । और अपनी डॉक्टर बनने की बाते अपने पिता सोनू से बताई। सोनू उस दिन काफी लंबी सांस ली । और बोला थैंक गौड़ मेरा सारा बोझ हल्का हो गया अब स्वेता अपने पिता का खर्च उठा रही थी। सोनू को एनिमेशन वीडियो बनाना काफी पसंद था सोनू मन लगा कर एनीमेशन पर काम करने लगा। और अपने एनीमेशन से लोगो का दिल जीतने लगा फैन फोलोइंग काफी ज्यादा कम समय में बढ़ गई। अब सोनू भी पैसा कमाने लगा था शोशल मीडिया से । अब सोनू के पास पैसे की कोई कमी नहीं रहा। दिवाली आ जाता हैं सोनू नए घर और गाड़ी खरीदता है। और पूरा लाइट से जगमगा उठता हैं। लेकिन अपने लक्जरी लाइफ के बारे में अपने गांव में नहीं बताता है। इधर गांव में भी सोनू के मम्मी पापा भी दिवाली मना रहे थे इधर उधर दीप जला रहे थे। सोनू के मम्मी दीप जला दिए अपने घर के अंदर और फिर बाहर दीप जलाने लगें । उतने देर में ही एक बिल्ली आती हैं और घर के अंदर का दीप को गिरा देती हैं। नीचे कपड़ा रखा हुआ था । धीरे धीरे कपड़ा जला और उस घर में आग लग गई और सोनू के गांव वाली घर पूरी तरह जल गया। सोनू के मम्मी अपनी घटना को सोनू को सुनाई। सोनू ने पूछा किसी को कुछ हुआ तो नहीं न। और सोनू बोला मेरे पास अभी पैसे नहीं दो चार दिन में भेजता हु। फिर सोनू यही मौका देखकर कुछ IDEA लाया अपने पैरेंट्स को अपनी गलती याद दिलाने का। सोनू अपने पूरे प्लान स्वेता को बताता है। स्वेता जाती हैं सोनू के गांव ओर जाती है और सोनू के जले हुए घर पर जाती हैं। और बोलती हैं। ये किसका घर है जो जल गया है। सोनू के मम्मी को लगा ये अमीर घर कि बेटी लगती हैं। शायद ये कुछ हमारी मदद करे। यहीं सोच कर सोनू के मम्मी स्वेता के पास जाती हैं। और अपनी दिवाली में जले हुए घर के बारे में बताई बेटी मेरे घर में जो भी खाने पीने का सामान था वो जल गया। न तो खाने को कुछ बचा है न ही रहने को घर थोड़े बहुत पैसे थे वो भी जल गए। स्वेता बोलती हैं देखिए आप सब शांत रहिए हम आपके लिए ही आए है। ये बोलकर स्वेता अपने कार के पास जाती हैं। और कार से पैसे वाले बैग लाती हैं और सोनू के मम्मी को देती हैं। ये देखकर सोनू के मम्मी इमोशनल हो जाती हैं। और बोलती है बेटी आप कौन हो और मुझे हेल्प क्यों कर रही हो। ये बात सुनकर स्वेता बोलती हैं ।
मै वही लड़की हु। जो बचपन में आपके घर आई थी। तो आपलोगो ने मुझे उसी दिन घर से भगा दिया था। जिस दिन आपके घर आई थी। ये बात सुनकर सोनू के मम्मी स्वेता के पैर पे गिर जाती हैं। और रो रो कर माफ़ी मांगने लगती हैं। मुझे माफ कर दो बेटी । फिर स्वेता बोलती हैं अगर आपको सच में माफ़ी मांगनी है तो आप अपने बेटे से मांगिए जो आपलोग उनके कोई भी काम में उन्हें सपोर्ट नहीं किए। आज मैं जो कुछ भी हु। उनके वजह से हु । उन्होंने मेरे लिए अपनी आजादी और शिक्षा को त्याग कर दिए हैं। अपने पिता जी का तो पता नहीं लेकिन पिता जी से भी बढ़ कर उन्होंने मेरे लिए किया है। और आपने तो कुछ बड़ी गलती की भी नहीं है जब मुझे मेरे अंकल आंटी अपने घर से निकाल सकते हैं तो फिर आप तो भले दूसरे घर के है, आप ही क्यों धरती के 99% लोग मुझे अपनी फैमली मेंबर बनाने से इनकार कर देते आज के दौर में दुनिया स्वार्थी हो गया है। कोई किसी के लिए नहीं सोचता उसी में से 1% लोग भगवान रूपी होते जैसे आपके घर में है सोनू अंकल अब मेरे वे अंकल ही नहीं पापा भी है। तो बेटी सोनू को नहीं लाई
उनके पास टाइम नहीं था उन्होंने बोले हैं जो लोग उनसे मिलना चाहते हैं उन्हें यहां लेते आना।
